
बालाघाट जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का गंभीर आरोप, महिला की बच्चेदानी निकालनी पड़ी परिजनों ने स्त्री रोग विशेषज्ञ और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ सीएचएमओ से की शिकायत, जांच और सख्त कार्रवाई की मांगबालाघाट से अमित शुक्ला की रिपोर्ट।बालाघाट। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में प्रसव के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। खैरलांजी तहसील के ग्राम साकड़ी निवासी 26 वर्षीय ज्योति गाडेकर के परिजनों ने प्रसव के दौरान उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी शेंडे सहित संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को शिकायत सौंपी है। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसकी जान बचाने के लिए बच्चेदानी निकालनी पड़ी। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।ऑपरेशन के चार दिन बाद अस्पताल से मिली थी छुट्टीपरिजनों के अनुसार, ज्योति गाडेकर को 10 अक्टूबर को प्रसव के लिए बालाघाट जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। यहां ऑपरेशन के माध्यम से बच्ची का जन्म हुआ। इसके बाद 14 अक्टूबर को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिजनों का आरोप है कि घर पहुंचने के बाद ज्योति की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उसकी जांच कराई गई और उसे बालाघाट के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया।बच्चेदानी में टांके नहीं लगाने का आरोपपरिजनों ने आरोप लगाया है

कि सीजेरियन ऑपरेशन के दौरान बच्चेदानी में टांके लगाने में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण संक्रमण फैलने से महिला की स्थिति गंभीर हो गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। परिजनों के मुताबिक, निजी अस्पताल में महिला की जान बचाने के लिए चिकित्सकों को उसकी बच्चेदानी निकालने का निर्णय लेना पड़ा। इस घटना के बाद महिला के भविष्य में गर्भधारण कर मां बनने की संभावना समाप्त हो गई है, जिससे परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचा है।आशा कार्यकर्ता पर भी छह हजार रुपये मांगने का आरोपमामले में आशा कार्यकर्ता मंजू दांदरे पर भी ऑपरेशन के नाम पर छह हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है। परिजनों ने इस आरोप की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायत में संबंधित चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने, संबंधित डॉक्टर का लाइसेंस निरस्त करने तथा आशा कार्यकर्ता को बर्खास्त करने की मांग की गई है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना अभी बाकी है।जिला अस्पताल की प्रसूति सेवाओं पर उठे सवालइस मामले ने जिला अस्पताल की प्रसूति सेवाओं, ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव के बाद महिला की स्थिति बिगड़ने के कारणों, उपचार के दौरान अपनाई गई चिकित्सकीय प्रक्रिया और निजी अस्पताल में बच्चेदानी निकालने की आवश्यकता की विशेषज्ञों से जांच कराया जाना महत्वपूर्ण होगा।अब यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य विभाग शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच में किन तथ्यों का खुलासा होता है। फिलहाल, परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट और संबंधित चिकित्सकीय अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
भागचंद गाडेकर, पीड़िता के ससुर।